Explained: कैसे काम करता है e-Vitara का बैटरी रेंटल मॉडल, कितना है 1 किमी चलाने का खर्च?

e-Vitara का बैटरी रेंटल मॉडल कैसे करता है काम, 1 किलोमीटर चलाने में कितना आता है खर्च? आसान भाषा में समझिए पूरी प्रक्रिया

Suzuki की आने वाली e-Vitara इलेक्ट्रिक SUV को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसके बैटरी रेंटल मॉडल की हो रही है। यह सिस्टम उन ग्राहकों के लिए बनाया गया है जो इलेक्ट्रिक कार तो लेना चाहते हैं लेकिन बैटरी की ऊंची कीमत एक साथ नहीं चुकाना चाहते। आम तौर पर EV की कुल कीमत का बड़ा हिस्सा बैटरी होती है, और इसी वजह से इलेक्ट्रिक कारें महंगी लगती हैं। बैटरी रेंटल मॉडल में ग्राहक कार की बॉडी और मोटर खरीदता है, जबकि बैटरी को कंपनी से किराये पर लेता है।

इस मॉडल का फायदा यह है कि शुरुआती खरीद कीमत काफी कम हो जाती है और ग्राहक हर महीने या हर किलोमीटर के हिसाब से बैटरी इस्तेमाल का भुगतान करता है। साथ ही बैटरी की हेल्थ, रिप्लेसमेंट और टेक्निकल जिम्मेदारी कंपनी की रहती है। यानी अगर बैटरी की परफॉर्मेंस समय के साथ कम होती है तो ग्राहक को नई बैटरी लेने की चिंता नहीं करनी पड़ती, क्योंकि वह रेंटल प्लान के अंदर ही कवर रहती है।

पहलूबैटरी रेंटल मॉडल में व्यवस्था
बैटरी का मालिककंपनी
ग्राहक की जिम्मेदारीसिर्फ कार और ड्राइविंग
शुरुआती कीमतसामान्य EV से कम
मेंटेनेंसबैटरी का रखरखाव कंपनी करेगी
भुगतान तरीकामासिक या प्रति किलोमीटर
रिस्क फैक्टरबैटरी खराब होने का जोखिम नहीं

बैटरी रेंटल मॉडल असल में कैसे काम करता है
जब ग्राहक e-Vitara खरीदता है, तो उसे दो विकल्प मिल सकते हैं। पहला, बैटरी के साथ पूरी कार खरीदना और दूसरा, बैटरी को किराये पर लेना। रेंटल विकल्प में ग्राहक एक तय मासिक फीस या प्रति किलोमीटर चार्ज देता है। उदाहरण के तौर पर मान लें कंपनी 8 से 10 रुपये प्रति किलोमीटर का चार्ज तय करती है, तो जितनी दूरी कार चलेगी, उतना ही भुगतान करना होगा। कुछ प्लान ऐसे भी हो सकते हैं जिनमें फिक्स किलोमीटर पैकेज दिया जाए, जैसे 1,500 या 2,000 किमी प्रति माह।

1 किलोमीटर चलाने का खर्च कितना हो सकता है
अगर बैटरी रेंटल चार्ज औसतन 9 रुपये प्रति किलोमीटर माना जाए और चार्जिंग की बिजली लागत लगभग 1.5 से 2 रुपये प्रति किलोमीटर आए, तो कुल खर्च लगभग 10.5 से 11 रुपये प्रति किलोमीटर के आसपास बैठ सकता है। यह खर्च पेट्रोल कार से तुलना करें तो कई शहरों में पेट्रोल कार का रनिंग कॉस्ट 12 से 15 रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच जाता है। इस तरह e-Vitara का बैटरी रेंटल मॉडल रोजाना इस्तेमाल में जेब पर हल्का पड़ सकता है।

ग्राहकों को क्या फायदा मिलेगा
इस मॉडल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ग्राहक को बैटरी की लाइफ या रिप्लेसमेंट को लेकर चिंता नहीं करनी पड़ेगी। आम तौर पर EV बैटरी की कीमत लाखों रुपये में होती है, लेकिन रेंटल मॉडल में अगर कुछ साल बाद बैटरी कमजोर हो जाती है तो कंपनी उसे बदल सकती है। इससे सेकेंड हैंड वैल्यू भी बेहतर रहती है क्योंकि कार के साथ पुरानी बैटरी का रिस्क नहीं जुड़ा होता।

क्या इसमें कोई नुकसान भी है
हर मॉडल के साथ कुछ सीमाएं भी होती हैं। बैटरी रेंटल में ग्राहक लंबे समय तक कार चलाता है तो कुल खर्च बढ़ सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति साल में बहुत ज्यादा किलोमीटर ड्राइव करता है, तो पर-किमी चार्ज उसके लिए ज्यादा पड़ सकता है। ऐसे में ऐसे यूजर्स के लिए बैटरी के साथ पूरी कार खरीदना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

किस तरह के यूजर्स के लिए सही है यह मॉडल
जो लोग पहली बार इलेक्ट्रिक कार खरीदना चाहते हैं और बैटरी की ऊंची कीमत से बचना चाहते हैं, उनके लिए यह मॉडल अच्छा विकल्प बन सकता है। शहरी यूजर्स, जो रोजाना सीमित दूरी तय करते हैं, उनके लिए प्रति किलोमीटर भुगतान ज्यादा व्यावहारिक साबित हो सकता है। वहीं जो लोग लंबी दूरी ज्यादा तय करते हैं, उन्हें अपने इस्तेमाल के हिसाब से प्लान चुनना चाहिए।

निष्कर्ष
e-Vitara का बैटरी रेंटल मॉडल इलेक्ट्रिक कार को आम लोगों तक पहुंचाने की एक नई कोशिश है। कम शुरुआती कीमत, बैटरी रिप्लेसमेंट की चिंता से आजादी और तय रनिंग कॉस्ट इसे आकर्षक बनाते हैं। हालांकि ज्यादा ड्राइव करने वालों के लिए यह मॉडल महंगा भी साबित हो सकता है। कुल मिलाकर यह सिस्टम उन ग्राहकों के लिए फायदेमंद है जो कम बजट में EV का अनुभव लेना चाहते हैं और बैटरी से जुड़े जोखिम नहीं उठाना चाहते।

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